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SNDT Women's University) का इतिहास

श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसी महिला विश्वविद्यालय (SNDT Women's University) का इतिहास

स्थापना की पृष्ठभूमि

भारत में 19वीं और 20वीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों में महिलाओं की शिक्षा को समाज में अधिक महत्व नहीं दिया जाता था। इसी सामाजिक स्थिति को बदलने के उद्देश्य से प्रसिद्ध समाज सुधारक डॉ. धोंडो केशव कर्वे (Dr. Dhondo Keshav Karve) ने महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कार्य किया।

डॉ. कर्वे ने 1916 में पुणे में एक महिला विश्वविद्यालय की स्थापना की, जिसे पहले "भारतीय महिला विश्वविद्यालय" कहा जाता था। बाद में, प्रसिद्ध व्यापारी सर वंशुधर दामोदर ठाकरसी ने विश्वविद्यालय को आर्थिक सहायता प्रदान की। इसके बाद, विश्वविद्यालय का नाम उनकी माता श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसी के नाम पर रखा गया।

मुख्य घटनाएँ और विकास

विश्वविद्यालय की विशेषताएँ

भारत का पहला महिला विश्वविद्यालय, जो केवल महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा प्रदान करता है।

महाराष्ट्र के अलावा, भारत के कई राज्यों में इसकी संबद्ध महाविद्यालय हैं।

यह विश्वविद्यालय कला, विज्ञान, वाणिज्य, प्रबंधन, शिक्षा, सामाजिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कानून जैसे कई विषयों में पाठ्यक्रम प्रदान करता है।

SNDT ने महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।


निष्कर्ष

SNDT महिला विश्वविद्यालय ने 100 से अधिक वर्षों तक महिलाओं को शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में प्रेरित किया है। इसकी स्थापना एक महान उद्देश्य से हुई थी, और आज भी यह भारतीय महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा के सबसे महत्वपूर्ण संस्थानों में से एक है।

भारत का पहला महिला विश्वविद्यालय, श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसी महिला विश्वविद्यालय (SNDT Women's University), वर्ष 1916 में पुणे, महाराष्ट्र में स्थापित किया गया था। इसे भारत में महिला शिक्षा को बढ़ावा देने और महिलाओं के सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू किया गया था।

स्थापना और इतिहास

इसकी स्थापना डॉ. धोंडो केशव कर्वे (Dr. Dhondo Keshav Karve) ने की थी, जो महिलाओं की शिक्षा के प्रबल समर्थक थे।

डॉ. कर्वे ने अपनी पत्नी के निधन के बाद विधवा महिलाओं की शिक्षा के लिए प्रयास किए और इसी उद्देश्य से उन्होंने यह विश्वविद्यालय स्थापित किया।

प्रारंभ में, इसे "भारतीय महिला विश्वविद्यालय" के रूप में जाना जाता था।

1920 में, प्रसिद्ध व्यापारी सर वंशुधर दामोदर ठाकरसी ने विश्वविद्यालय को आर्थिक सहायता प्रदान की, जिसके बाद इसका नाम उनकी माता नाथीबाई दामोदर ठाकरसी के नाम पर रखा गया।

1936 में, विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर मुंबई स्थानांतरित कर दिया गया, लेकिन पुणे में भी इसका एक बड़ा केंद्र बना रहा।


विश्वविद्यालय की विशेषताएँ

यह विश्वविद्यालय विशेष रूप से महिलाओं को उच्च शिक्षा प्रदान करने के लिए समर्पित है।

इसमें कला, विज्ञान, वाणिज्य, शिक्षा, सामाजिक विज्ञान, प्रबंधन और प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।

विश्वविद्यालय से संबद्ध कई महाविद्यालय और अनुसंधान केंद्र हैं।

यह भारत और विदेशों में महिला शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित संस्थान माना जाता है।


कैम्पस और पाठ्यक्रम

SNDT महिला विश्वविद्यालय के मुख्य कैम्पस मुंबई, पुणे और अन्य स्थानों पर स्थित हैं।

इसमें स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट स्तर के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।

विश्वविद्यालय में नियमित और दूरस्थ शिक्षा (distance learning) दोनों की सुविधा है।

इसमें लड़कियों के लिए व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े कई कोर्स भी उपलब्ध हैं।


महत्व और योगदान

SNDT विश्वविद्यालय ने महिलाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करके भारतीय समाज में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इसने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और विभिन्न क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए सक्षम बनाया है।

यहां से पढ़ी कई महिलाएँ समाज में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर रही हैं।


निष्कर्ष

श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसी महिला विश्वविद्यालय भारतीय महिला शिक्षा आंदोलन का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह विश्वविद्यालय महिलाओं को उच्च शिक्षा और आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करता है और समाज में उनके सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभाता है।

अगर आप SNDT विश्वविद्यालय से संबंधित अधिक जानकारी चाहते हैं, तो उनकी आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं: www.sndt.ac.in


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