--- पाली भाषा: एक विस्तृत अध्ययन परिचय पाली एक प्राचीन इंडो-आर्यन भाषा है जो विशेष रूप से बौद्ध धर्म के थेरवाद (Theravāda) सम्प्रदाय की धार्मिक ग्रंथों की भाषा के रूप में प्रसिद्ध है। यह भाषा भारतीय उपमहाद्वीप की प्राकृत भाषाओं में से एक है और संस्कृत के समान होने के बावजूद, यह अधिक सरल और जनसामान्य के उपयोग की भाषा रही है। पाली शब्द का अर्थ होता है “पंक्ति” या “पाठ”, जिसे समय के साथ ग्रंथों की भाषा के रूप में जाना जाने लगा। पाली का प्रयोग विशेषकर त्रिपिटक या 'पालि कैनन' में हुआ है, जो थेरवादी बौद्ध ग्रंथों का मूल आधार है। --- पाली भाषा का इतिहास प्रारंभिक विकास पाली भाषा का उद्भव लगभग 3वीं शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास माना जाता है। इसका विकास भारतीय उपमहाद्वीप की मध्य-भारतीय बोलियों से हुआ, जिन्हें सामूहिक रूप से 'प्राकृत' कहा जाता है। ये बोलियाँ वैदिक और शास्त्रीय संस्कृत से अलग थीं और आम जनता द्वारा बोली जाती थीं। बुद्ध के समय की भाषा ऐसा माना जाता है कि गौतम बुद्ध ने अपनी शिक्षाएं जनसाधारण की भाषा में दीं, जो कि उस समय की मध्य-भारतीय भाषाएं थीं। यद्यपि बुद्ध की वास्तव...
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