चेन्नई: बारिश के बावजूद प्यासा शहर Chennai भारत के उन महानगरों में शामिल है जहां पर्याप्त वर्षा होने के बावजूद पानी का गंभीर संकट बना रहता है। यह स्थिति केवल प्राकृतिक कारणों से नहीं बल्कि मानव गतिविधियों, अव्यवस्थित शहरीकरण और पारंपरिक जल संरचनाओं की उपेक्षा के कारण उत्पन्न हुई है। चेन्नई में पानी की विडंबना चेन्नई में हर वर्ष लगभग 1,200 मिमी वर्षा होती है। इतनी बारिश किसी भी बड़े शहर की जल आवश्यकताओं को काफी हद तक पूरा कर सकती है। फिर भी शहर अक्सर जल संकट, सूखे और टैंकरों पर निर्भरता से जूझता है। इसका मुख्य कारण वर्षा जल को संरक्षित करने वाली पारंपरिक प्रणालियों का कमजोर हो जाना है। विशेषज्ञों के अनुसार शहर में अब केवल सीमित मात्रा में पानी संग्रहित करने की क्षमता बची है। लगातार बढ़ती आबादी और कंक्रीट के फैलाव ने प्राकृतिक जल पुनर्भरण को बहुत कम कर दिया है। पारंपरिक तालाबों की ऐतिहासिक भूमिका तमिलनाडु में हजारों पारंपरिक तालाब मौजूद रहे हैं। इनमें “कुलम” नामक मंदिर तालाब विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहे हैं। चेन्नई नगर क्षेत्र में भी अनेक ऐसे तालाब थे जो: वर्षा जल ...
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