मार्क्सवादी विचारधारा मार्क्सवादी विचारधारा कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स के विचारों पर आधारित सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दर्शन है। इसका व्यवस्थित विकास 19वीं शताब्दी में हुआ। मार्क्सवाद समाज और इतिहास को मुख्य रूप से आर्थिक संबंधों, उत्पादन के साधनों और वर्ग-संघर्ष के आधार पर समझता है। 1. वर्ग-संघर्ष मार्क्सवाद के अनुसार समाज में अलग-अलग वर्गों के हित अक्सर एक-दूसरे से टकराते हैं। पूँजीवादी व्यवस्था में मुख्य रूप से पूँजीपति वर्ग (बुर्जुआ वर्ग) और मजदूर वर्ग (सर्वहारा वर्ग) के बीच संघर्ष दिखाई देता है। पूँजीपति उत्पादन के साधनों के मालिक होते हैं, जबकि मजदूर अपनी श्रम-शक्ति बेचकर जीवनयापन करते हैं। 2. ऐतिहासिक भौतिकवाद मार्क्सवादी चिंतन में इतिहास के विकास को समझने के लिए आर्थिक परिस्थितियों और उत्पादन संबंधों को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे ऐतिहासिक भौतिकवाद कहा जाता है। इसके अनुसार उत्पादन की व्यवस्था में होने वाले परिवर्तन समाज की संस्थाओं और सामाजिक संबंधों को भी प्रभावित करते हैं। 3. निजी संपत्ति की आलोचना मार्क्सवाद विशेष रूप से उत्पादन के साधनों की निजी पूँजीवा...
ग्रीन एनर्जी (हरित ऊर्जा) – पूर्ण जानकारी 1. भूमिका आज की दुनिया ऊर्जा पर निर्भर है। उद्योग, परिवहन, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जीवन—सब कुछ ऊर्जा के बिना संभव नहीं। परंपरागत ऊर्जा स्रोत जैसे कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सीमित हैं और इनके उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ रही हैं। इन्हीं चुनौतियों के समाधान के रूप में ग्रीन एनर्जी (हरित ऊर्जा) सामने आती है, जो नवीकरणीय, स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल होती है। 2. ग्रीन एनर्जी की परिभाषा ग्रीन एनर्जी वह ऊर्जा है जो प्राकृतिक, नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त होती है और जिसके उत्पादन व उपयोग से पर्यावरण को न्यूनतम क्षति पहुँचती है। इसे स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) भी कहा जाता है क्योंकि इसमें कार्बन उत्सर्जन बहुत कम होता है। 3. ग्रीन एनर्जी और नवीकरणीय ऊर्जा में अंतर नवीकरणीय ऊर्जा: वे स्रोत जो प्राकृतिक रूप से पुनः उत्पन्न होते हैं (जैसे सूर्य, हवा, पानी)। ग्रीन एनर्जी: नवीकरणीय होने के साथ-साथ पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुँचाने वाली ऊर्जा। हर नवीकरणीय ऊर्जा ग्रीन हो, यह जरूरी नहीं; लेकिन अधिकांश ग्...