नाग पंचमी : इतिहास, पौराणिक कथाएँ, पूजा-विधि, महत्व और आधुनिक संदेश
नाग पंचमी : इतिहास, पौराणिक कथाएँ, पूजा-विधि, महत्व और आधुनिक संदेश भारत त्योहारों और धार्मिक परंपराओं की भूमि है। यहां मनाए जाने वाले पर्व केवल धार्मिक आस्था से जुड़े नहीं होते, बल्कि उनके पीछे प्रकृति, पर्यावरण, कृषि, सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक विरासत की भी गहरी भूमिका होती है। नाग पंचमी ऐसा ही एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें नागों अर्थात सर्पों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया जाता है। नाग पंचमी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार को है। पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम से शुरू होकर 17 अगस्त की शाम तक रहने की जानकारी पंचांग स्रोतों में दी गई है। स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार पूजा का समय कुछ अंतर के साथ हो सकता है। नाग पंचमी का संबंध भगवान शिव, भगवान विष्णु के शेषनाग, नागराज वासुकि, तक्षक और अनेक पौराणिक कथाओं से मिलता है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। --- 1. नाग पंचमी क्या है? 'नाग पंचमी' दो शब्दों से मिलकर बना है—नाग और पंचमी। नाग का अर्थ सर्प या नाग देवता ...