--- मकर संक्रांति का शाब्दिक और धार्मिक अर्थ ‘मकर’ का अर्थ है मकर राशि और ‘संक्रांति’ का अर्थ है एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश। जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब इस खगोलीय परिवर्तन को मकर संक्रांति कहा जाता है। हिंदू पंचांग में वर्ष भर में 12 संक्रांतियाँ आती हैं, लेकिन मकर संक्रांति को विशेष महत्व प्राप्त है क्योंकि यह सूर्य के उत्तरायण होने का संकेत देती है। शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण काल को देवताओं का दिन और दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि कहा गया है। यही कारण है कि मकर संक्रांति से पुण्यकाल की शुरुआत मानी जाती है। धार्मिक दृष्टि से यह पर्व पापों के नाश, पुण्य की प्राप्ति और आत्मिक शुद्धि का प्रतीक है। इस दिन किया गया दान, स्नान, जप और पूजा कई गुना फलदायी मानी जाती है। --- सूर्य का उत्तरायण होना: वैज्ञानिक दृष्टिकोण मकर संक्रांति केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि इसका गहरा वैज्ञानिक आधार भी है। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और अपने अक्ष पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है। इसी झुकाव के कारण पृथ्वी पर ऋतु...
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