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एटीएम (ऑटोमेटेड टेलर मशीन) का इतिहास, कार्यप्रणाली और आधुनिक युग में प्रभाव

एटीएम (ऑटोमेटेड टेलर मशीन) का इतिहास, कार्यप्रणाली और आधुनिक युग में प्रभाव परिचय ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) आधुनिक बैंकिंग का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। यह ग्राहकों को बैंकों की शाखाओं में जाए बिना नकद निकासी, बैलेंस चेक करने और अन्य बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठाने की सुविधा देता है। एटीएम की शुरुआत 20वीं शताब्दी के मध्य में हुई थी और तब से यह लगातार विकसित हो रहा है। इस लेख में हम एटीएम के इतिहास, कार्यप्रणाली, प्रकार और आधुनिक बैंकिंग में इसके प्रभाव पर विस्तार से चर्चा करेंगे। --- एटीएम का इतिहास एटीएम का प्रारंभिक विकास एटीएम की अवधारणा 20वीं शताब्दी के मध्य में विकसित हुई। पहला एटीएम 27 जून 1967 को लंदन में बार्कलेज बैंक द्वारा लगाया गया था। इसे जॉन शेफर्ड बैरन नामक स्कॉटिश आविष्कारक ने डिज़ाइन किया था। शुरुआती एटीएम मशीन टोकन आधारित थी, जिसमें चुंबकीय स्याही वाले चेक का उपयोग किया जाता था। इसके बाद, 1969 में डॉन वेत्ज़ेल नामक अमेरिकी इंजीनियर ने एक और उन्नत एटीएम विकसित किया, जो बैंकिंग कार्ड और पिन (PIN) प्रणाली पर आधारित था। भारत में एटीएम का आगमन भारत में पहला एटीएम 1987 में ...