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वाहन का स्टार्टर मोटर: एक विस्तृत अध्ययन




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वाहन का स्टार्टर मोटर: एक विस्तृत अध्ययन

परिचय

जब हम किसी वाहन को स्टार्ट करते हैं, तो इंजन को घुमाने के लिए एक विशेष उपकरण की आवश्यकता होती है। यह उपकरण होता है स्टार्टर मोटर। यह एक विद्युतचालित मोटर होती है जो वाहन के इंजन को पहली बार घुमाने के लिए आवश्यक टॉर्क प्रदान करती है, जिससे इंजन स्वयं कार्य करना शुरू कर देता है। आधुनिक युग में ऑटोमोबाइल तकनीक ने जबरदस्त विकास किया है, और स्टार्टर मोटर इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।


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स्टार्टर मोटर का इतिहास

स्टार्टर मोटर की शुरुआत 20वीं शताब्दी की शुरुआत में हुई। प्रारंभ में, वाहन चालकों को इंजन को हाथ से घुमाकर स्टार्ट करना पड़ता था, जिसे हैंड क्रैंकिंग कहा जाता था। यह प्रक्रिया जोखिमपूर्ण और कठिन थी। फिर 1912 में, अमेरिकी कंपनी Cadillac ने पहला इलेक्ट्रिक स्टार्टर मोटर बाजार में उतारा। इसके बाद इस तकनीक ने पूरे ऑटोमोबाइल उद्योग में क्रांति ला दी।


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स्टार्टर मोटर का कार्य सिद्धांत

स्टार्टर मोटर का कार्य सिद्धांत विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) पर आधारित होता है। यह निम्नलिखित चरणों में कार्य करता है:

1. इग्निशन स्विच ऑन करने पर: बैटरी से विद्युत धारा स्टार्टर मोटर तक पहुँचती है।


2. सोलनॉइड एक्टिवेशन: मोटर से जुड़ा सोलनॉइड रिले कार्य करता है और फ्लाईव्हील से जुड़ने के लिए मोटर के पिनियन गियर को आगे बढ़ाता है।


3. इंजन को घुमाना: मोटर घुमना शुरू करती है और इंजन के फ्लाईव्हील को घुमाती है।


4. इंजन स्टार्ट हो जाने पर: मोटर स्वतः डिसकनेक्ट हो जाती है।




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स्टार्टर मोटर के प्रमुख घटक

1. आर्मेचर (Armature):
एक घूर्णन भाग जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है।


2. कम्युटेटर (Commutator):
विद्युत धारा की दिशा को नियमित करता है।


3. ब्रश (Brushes):
कम्युटेटर से विद्युत संपर्क बनाए रखते हैं।


4. फील्ड कॉइल (Field Coil):
चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।


5. सोलनॉइड (Solenoid):
स्टार्टर मोटर को ऑन-ऑफ करने के लिए प्रयुक्त होता है।


6. पिनियन गियर (Pinion Gear):
इंजन के फ्लाईव्हील से जुड़ता है और उसे घुमाता है।




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स्टार्टर मोटर के प्रकार

1. डायरेक्ट ड्राइव स्टार्टर मोटर (Direct Drive Starter Motor)

सरल निर्माण।

कम लागत।

हल्के वाहनों में उपयोग।


2. गियर रिडक्शन स्टार्टर मोटर (Gear Reduction Starter Motor)

गियर के माध्यम से टॉर्क बढ़ाया जाता है।

भारी वाहनों में उपयोग।


3. प्लैनेटरी गियर स्टार्टर मोटर (Planetary Gear Starter Motor)

कॉम्पैक्ट आकार।

उच्च शक्ति के साथ हल्का वजन।


4. इनर्शिया स्टार्टर मोटर (Inertia Starter Motor)

पुराने वाहनों में उपयोग होता था।

अब प्रचलन में नहीं है।



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स्टार्टर मोटर की कार्य प्रणाली

चरण 1: इग्निशन स्विच ऑन करना

जैसे ही चालक इग्निशन की को घुमाता है, सर्किट पूरा होता है और बैटरी से धारा सोलनॉइड तक पहुँचती है।

चरण 2: सोलनॉइड की क्रिया

सोलनॉइड एक विद्युत चुंबकीय उपकरण है जो पिनियन गियर को फ्लाईव्हील से जोड़ने का कार्य करता है।

चरण 3: मोटर का संचालन

पिनियन गियर फ्लाईव्हील को घुमाता है और इंजन में प्रारंभिक दहन (combustion) की प्रक्रिया शुरू होती है।

चरण 4: स्वतः कटऑफ

इंजन स्टार्ट हो जाने पर सोलनॉइड स्वतः मोटर को सर्किट से हटा देता है।


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स्टार्टर मोटर की विफलता के सामान्य कारण

1. तारों में ढीलापन या टूट-फूट।


2. बैटरी की कम वोल्टेज।


3. सोलनॉइड का खराब होना।


4. ब्रश घिस जाना।


5. कम्युटेटर में खराबी।


6. गियर जाम हो जाना।




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स्टार्टर मोटर की जाँच एवं मरम्मत

1. वोल्टेज परीक्षण: बैटरी से सही वोल्टेज पहुँच रहा है या नहीं।


2. विजुअल निरीक्षण: टूटे हुए या जले हुए तारों की पहचान।


3. कंटीन्यूटी टेस्ट: मल्टीमीटर से कॉइल और ब्रश की जांच।


4. सोलनॉइड टेस्टिंग: सोलनॉइड की क्रिया का परीक्षण।



अगर ये सभी चीजें ठीक हों, तो मोटर को दोबारा इंस्टॉल किया जा सकता है, अन्यथा उसे बदला जाना चाहिए।


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स्टार्टर मोटर का रखरखाव (Maintenance)

समय-समय पर तारों और कनेक्शन की जांच करें।

धूल और ग्रीस से साफ रखें।

बैटरी की स्थिति बनाए रखें।

लंबे समय तक उपयोग न होने पर इंजन को समय-समय पर स्टार्ट करें।



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स्टार्टर मोटर बनाम क्रैंकिंग हैंडल


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भविष्य की तकनीकें

आजकल स्वचालित स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम (Auto Start-Stop System) का उपयोग हो रहा है, जिससे ट्रैफिक में गाड़ी बंद होने पर इंजन खुद बंद और स्टार्ट हो जाता है। इसमें स्टार्टर मोटर और अधिक स्मार्ट एवं ऊर्जा दक्ष बन चुकी है।


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निष्कर्ष

स्टार्टर मोटर वाहन का एक अनिवार्य हिस्सा है जो इंजन को आरंभ करने के लिए आवश्यक प्रारंभिक टॉर्क प्रदान करता है। इसके बिना किसी भी वाहन को स्टार्ट करना संभव नहीं है। तकनीकी दृष्टिकोण से इसका रखरखाव आसान है लेकिन समय पर जाँच और मरम्मत आवश्यक होती है। जैसे-जैसे ऑटोमोबाइल तकनीक आगे बढ़ रही है, स्टार्टर मोटर भी स्मार्ट और अधिक टिकाऊ बनती जा रही है।


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