ब्लैक प्लेग (Black Death) वास्तव में इतिहास की सबसे घातक महामारियों में से एक थी। यह 14वीं
शताब्दी में (1347–1351) यूरोप, एशिया और उत्तरी अफ्रीका में फैली और अनुमान है कि उस समय लगभग 7.5 से 20 करोड़ लोग इसकी वजह से मारे गए थे।
कुछ और महत्वपूर्ण बातें:
कारक जीव (Pathogen): जैसा आपने बताया, इसका कारण Yersinia pestis नामक बैक्टीरिया है।
वाहक (Vector): चूहों पर पाए जाने वाले पिस्सू (fleas) इसके प्रमुख वाहक थे।
प्रकार (Types):
ब्यूबोनिक प्लेग: इसमें लसीका ग्रंथियों (lymph nodes) में सूजन और दर्दनाक गाठें (buboes) बन जाती थीं।
सेप्टिसेमिक प्लेग: यह खून में संक्रमण फैलाकर बहुत तेजी से मौत का कारण बनता था।
न्यूमोनिक प्लेग: इसमें फेफड़ों को प्रभावित करके खांसी और खून आने लगता था, और यह एकमात्र प्रकार था जो इंसान से इंसान में हवा द्वारा फैल सकता था।
लक्षण: तेज बुखार, ठंड लगना, उल्टी, कमजोरी, और त्वचा पर काले धब्बे (इसी से नाम Black Death पड़ा)।
इतिहास में असर: इसने यूरोप की आबादी का लगभग एक-तिहाई खत्म कर दिया और सामाजिक, धार्मिक व आर्थिक ढांचे को गहराई से बदल दिया।
ब्लैक प्लेग (Black Death) या महामारी प्लेग की शुरुआत एशिया से ही हुई थी। इतिहासकार मानते हैं कि इसका पहला बड़ा प्रकोप 1340 के दशक में चीन और मध्य एशिया में हुआ। उस समय मंगोल साम्राज्य (Mongol Empire) के कारण एशिया और यूरोप के बीच व्यापार बहुत सक्रिय था।
सिल्क रूट (Silk Road) जैसे व्यापार मार्गों से व्यापारी, सैनिक और यात्री जब एक जगह से दूसरी जगह जाते थे तो उनके साथ पिस्सू और चूहे भी जाते थे, जिनसे यह बीमारी फैलती थी।
1347 में यह बीमारी क्राइमिया (Crimea) के बंदरगाह शहरों तक पहुँची और वहाँ से जहाज़ों द्वारा इटली तथा फिर पूरे यूरोप में फैल गई।
धीरे-धीरे यह उत्तरी अफ्रीका और मध्य-पूर्व तक भी फैल गई।
इतिहास में इसे मानव सभ्यता की सबसे भयंकर महामारियों में से एक माना जाता है, जिसमें केवल यूरोप में ही लगभग 2.5 से 3 करोड़ लोग (यानी उस समय की जनसंख्या का एक-तिहाई) मारे गए थे।
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