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राजकुमारी अमृत कौर : जीवन-परिचय





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राजकुमारी अमृत कौर : जीवन-परिचय




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अध्याय 1 : परिचय

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अनेक पुरुष और महिलाएँ सक्रिय रहीं, जिन्होंने अपने त्याग, संघर्ष और दूरदृष्टि से देश को एक नई दिशा दी। इन महान हस्तियों में एक नाम है राजकुमारी अमृत कौर का। वे न केवल स्वतंत्रता आंदोलन की सशक्त सेनानी थीं, बल्कि स्वतंत्र भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री (Health Minister) भी बनीं।

उन्होंने भारत में आधुनिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं की नींव रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सबसे बड़ा उदाहरण है – AIIMS (All India Institute of Medical Sciences), नई दिल्ली – जिसकी स्थापना का सपना उन्होंने देखा और उसे साकार किया।

अमृत कौर का जीवन एक राजकुमारी से जनसेविका बनने की गाथा है। वे पंजाब के कपूरथला रियासत के शाही परिवार से थीं, परंतु उन्होंने अपना जीवन विलासिता में बिताने के बजाय देश और जनता की सेवा को समर्पित कर दिया।


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अध्याय 2 : प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

जन्म: 2 फरवरी 1889, लखनऊ

पिता: राजा हरनाम सिंह (कपूरथला के शाही परिवार से)

माता: ईसाई पृष्ठभूमि से थीं।

अमृत कौर बचपन से ही धार्मिक, संस्कारी और अनुशासनप्रिय वातावरण में पली-बढ़ीं।


उनका परिवार ब्रिटिश हुकूमत के नजदीक था, लेकिन अमृत कौर ने शिक्षा और जागरूकता के बल पर अपना अलग मार्ग चुना। वे बचपन से ही भारत की सामाजिक स्थिति और महिलाओं की दयनीय दशा देखकर विचलित होती थीं।


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अध्याय 3 : शिक्षा और इंग्लैंड का अनुभव

शिक्षा की शुरुआत भारत से हुई, लेकिन उच्च शिक्षा के लिए उन्हें इंग्लैंड (ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी) भेजा गया।

वहाँ उन्होंने इतिहास और अंग्रेज़ी साहित्य पढ़ा।

इंग्लैंड में रहते हुए उन्होंने देखा कि वहाँ महिलाओं को शिक्षा और स्वतंत्रता कितनी अधिक है, जबकि भारत में महिलाएँ सामाजिक बंधनों में जकड़ी हुई हैं।

इस अनुभव ने उनके भीतर सुधारवादी दृष्टिकोण पैदा किया।



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अध्याय 4 : स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी

भारत लौटने के बाद उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया।

वे महात्मा गांधी से प्रभावित हुईं और उनके साथ काम करने लगीं।

नमक सत्याग्रह (1930) और अन्य आंदोलनों में भाग लेने पर उन्हें जेल भी जाना पड़ा।

उन्होंने ब्रिटिश सरकार के विरोध में महिलाओं को संगठित किया और भारतीय महिला आंदोलन की एक प्रमुख नेता बनीं।

वे ऑल इंडिया महिला सम्मेलन (AIWC) से जुड़ीं और महिला शिक्षा, समान अधिकार, तथा विवाह संबंधी सुधारों की पक्षधर रहीं।



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अध्याय 5 : महात्मा गांधी और अमृत कौर

अमृत कौर महात्मा गांधी की नजदीकी सहयोगी बनीं।

उन्होंने गांधीजी के आश्रम में समय बिताया और खादी आंदोलन में भी सक्रिय रहीं।

गांधीजी उन्हें “माई चाइल्ड” (My Child) कहकर संबोधित करते थे।

गांधीजी के विचारों ने उनके जीवन की दिशा तय कर दी – सादगी, सेवा और समाज सुधार।



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अध्याय 6 : स्वतंत्र भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री

1947 में भारत स्वतंत्र हुआ और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी पहली मंत्रिपरिषद बनाई।

अमृत कौर को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया।

वे लगभग 10 वर्षों (1947–1957) तक इस पद पर रहीं।

इस दौरान उन्होंने कई बड़े सुधार किए –

टीबी उन्मूलन के लिए योजनाएँ।

कुष्ठ रोग और मलेरिया नियंत्रण अभियान।

नर्सिंग और मेडिकल शिक्षा में सुधार।

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की शुरुआत।




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अध्याय 7 : AIIMS की स्थापना में भूमिका

उनका सबसे बड़ा योगदान था AIIMS, नई दिल्ली (All India Institute of Medical Sciences) की स्थापना।

उन्होंने भारत में विश्वस्तरीय चिकित्सा संस्थान का सपना देखा।

इसके लिए उन्होंने WHO और अन्य देशों से सहयोग लिया।

1956 में संसद ने AIIMS अधिनियम पारित किया और इस संस्थान की शुरुआत हुई।

आज AIIMS देश का सबसे बड़ा मेडिकल संस्थान और अस्पताल है।

इसे अक्सर लोग "AIIMS Amrit Kaur" भी कहते हैं, क्योंकि इसके पीछे वही प्रमुख प्रेरणा थीं।



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अध्याय 8 : महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार

अमृत कौर ने महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया।

उन्होंने ऑल इंडिया महिला सम्मेलन में नेतृत्व किया।

वे बाल विवाह और पर्दा प्रथा के खिलाफ थीं।

उन्होंने लड़कियों के लिए स्कूल और कॉलेज खोलने को प्रोत्साहित किया।



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अध्याय 9 : अंतरराष्ट्रीय मंचों पर योगदान

अमृत कौर केवल भारत तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय रहीं।

वे WHO की कार्यकारी बोर्ड की पहली महिला अध्यक्ष बनीं (1950)।

उन्होंने दुनिया को भारत की स्वास्थ्य नीति और विकास की दिशा दिखाई।

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।



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अध्याय 10 : व्यक्तित्व और विचारधारा

सादगीपूर्ण जीवन, परंतु दृढ़ निश्चयी।

गहरी आस्था और मानवीय दृष्टिकोण।

विलासिता से दूर रहकर केवल सेवा को अपनाया।

गांधीवादी आदर्शों पर आधारित जीवन।



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अध्याय 11 : निधन और विरासत

6 फरवरी 1964 को उनका निधन हुआ।

वे 75 वर्ष की थीं।

उनके निधन के बाद भी उनका सपना – एक स्वस्थ और सशक्त भारत – AIIMS और स्वास्थ्य नीतियों के रूप में जीवित है।

उन्हें भारत की महान समाजसेविका, स्वतंत्रता सेनानी और सुधारक के रूप में याद किया जाता है।



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अध्याय 12 : निष्कर्ष

राजकुमारी अमृत कौर का जीवन एक प्रेरणा है।
उन्होंने दिखाया कि शाही परिवार में जन्म लेने के बावजूद कोई व्यक्ति जनता की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित कर सकता है।
वे न केवल स्वतंत्रता आंदोलन की वीरांगना थीं, बल्कि स्वतंत्र भारत की पहली महिला कैबिनेट मंत्री के रूप में उन्होंने चिकित्सा और स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति की नींव रखी।

AIIMS, नई दिल्ली उनकी सबसे बड़ी विरासत है, जो आज भी भारत और दुनिया भर के मरीजों को सेवा प्रदान कर रहा है।
उनका नाम भारतीय इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।


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