ठीक है। 😊
आप "Eastern Ghats और Western Ghats" पर एक शब्दों का विस्तृत हिंदी लेख चाहते हैं। इसमें हम दोनों पर्वत शृंखलाओं का इतिहास, भौगोलिक स्थिति, संरचना, नदियाँ, जलवायु, वनस्पति, जीव-जंतु, खनिज, जनजीवन, सांस्कृतिक महत्व, पर्यटन, आर्थिक उपयोग और तुलनात्मक अध्ययन विस्तार से शामिल करेंगे।
---
Eastern Ghats और Western Ghats : एक विस्तृत अध्ययन
प्रस्तावना
भारत का भूगोल विविधताओं से भरा हुआ है। यहाँ ऊँचे-ऊँचे हिमालय, विशाल मैदान, मरुस्थल, तटीय प्रदेश और पठार पाए जाते हैं। इन्हीं भौगोलिक संरचनाओं में "घाट" (Ghats) का विशेष स्थान है। भारत में दो प्रमुख पर्वतमालाएँ हैं –
1. पूर्वी घाट (Eastern Ghats)
2. पश्चिमी घाट (Western Ghats)
ये दोनों पर्वत श्रृंखलाएँ भारत के दक्षिणी भाग में स्थित हैं और दक्कन का पठार (Deccan Plateau) इनसे घिरा हुआ है। पूर्वी घाट भारत के पूर्वी तट (बंगाल की खाड़ी) के समानांतर फैले हुए हैं, जबकि पश्चिमी घाट भारत के पश्चिमी तट (अरब सागर) के समानांतर फैले हैं।
---
1. पूर्वी घाट (Eastern Ghats)
1.1 भौगोलिक स्थिति
पूर्वी घाट भारत के पूर्वी तट पर स्थित हैं।
यह श्रृंखला ओडिशा से शुरू होकर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और उत्तरी कर्नाटक तक फैली है।
पूर्वी घाट बंगाल की खाड़ी के समानांतर चलती है लेकिन यह टूटे-फूटे रूप में दिखाई देती है।
यहाँ कई नदियाँ जैसे – गोदावरी, महानदी, कृष्णा और कावेरी इस पर्वतमाला को काटती हुई बहती हैं।
1.2 मुख्य शिखर
महेंद्रगिरि (Odisha) – लगभग 1501 मीटर
जिंदाघट्टा चोटी (आंध्र प्रदेश)
शेवरॉय हिल्स और जावादी हिल्स (तमिलनाडु)
1.3 भौगोलिक संरचना
पूर्वी घाट की चट्टानें प्राचीन हैं और ये ग्रेनाइट, ग्नाइस और शिस्ट से बनी हैं।
यह पर्वतमाला पश्चिमी घाट की तुलना में कम ऊँची और असंगठित है।
1.4 नदियाँ
महानदी
गोदावरी
कृष्णा
पेनार
कावेरी
ये नदियाँ पठार से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।
1.5 जलवायु
यहाँ उष्णकटिबंधीय जलवायु पाई जाती है।
आंध्र और तमिलनाडु वाले हिस्से में शुष्क जलवायु भी देखने को मिलती है।
मानसून के दौरान अच्छी वर्षा होती है, लेकिन पश्चिमी घाट जितनी नहीं।
1.6 वनस्पति और जीव-जंतु
शुष्क पर्णपाती वन और झाड़ीदार वन अधिक पाए जाते हैं।
साल, टीक, नीलगिरी, बाँस जैसी प्रजातियाँ मिलती हैं।
जीव-जंतुओं में बाघ, तेंदुआ, भालू, जंगली कुत्ता और कई पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
1.7 खनिज संपदा
बॉक्साइट, लौह अयस्क, मैंगनीज, कोयला आदि के भंडार।
विशाखापट्टनम क्षेत्र खनिजों से विशेष रूप से समृद्ध है।
1.8 मानव जीवन और संस्कृति
यहाँ जनजातीय आबादी जैसे – कुइ, गोंड, कोंध आदि रहती है।
खेती, वनोपज और खनन मुख्य आजीविका हैं।
आंध्र प्रदेश का तिरुपति बालाजी मंदिर और तमिलनाडु की जावादी हिल्स धार्मिक महत्व रखते हैं।
---
2. पश्चिमी घाट (Western Ghats)
2.1 भौगोलिक स्थिति
पश्चिमी घाट भारत के पश्चिमी तट पर स्थित हैं।
यह श्रृंखला गुजरात से शुरू होकर महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु तक फैली है।
यह सह्याद्रि पर्वतमाला के नाम से भी प्रसिद्ध है।
पश्चिमी घाट अधिक ऊँचे, निरंतर और व्यवस्थित हैं।
2.2 मुख्य शिखर
अनैमलाई (तमिलनाडु-केरल सीमा) – अनैमुदि शिखर (2695 मीटर) – दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी।
नीलगिरी पहाड़ियाँ (तमिलनाडु)
महाबलेश्वर (महाराष्ट्र)
कार्डामम हिल्स (केरल)
2.3 भौगोलिक संरचना
यह चट्टानें बेसाल्ट (ज्वालामुखीय चट्टानों) से बनी हैं।
दक्कन ट्रैप्स (Deccan Traps) का हिस्सा हैं।
घाट दर्रे जैसे – भोर घाट, थाल घाट, पालघाट दर्रा – यहाँ महत्वपूर्ण हैं।
2.4 नदियाँ
गोदावरी, कृष्णा, कावेरी और पेरियार जैसी नदियाँ यहाँ से निकलती हैं।
पश्चिम की ओर बहने वाली छोटी नदियाँ अरब सागर में गिरती हैं।
2.5 जलवायु
यहाँ उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु पाई जाती है।
पश्चिमी ढलान पर भारी वर्षा (विशेषकर केरल और कर्नाटक में)।
पूर्वी ढलान पर अपेक्षाकृत शुष्क जलवायु।
2.6 वनस्पति और जीव-जंतु
पश्चिमी घाट जैव-विविधता का वैश्विक हॉटस्पॉट है।
यहाँ सदाबहार वन, पर्णपाती वन, घासभूमि और दलदली वन पाई जाते हैं।
पौधों में चंदन, गुलमोहर, सुपारी, कॉफी, मसाले।
जीवों में हाथी, बाघ, गौर, शेर, अजगर, दुर्लभ मेंढक और पक्षी प्रजातियाँ।
यह क्षेत्र यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है।
2.7 खनिज संपदा
बॉक्साइट, लौह अयस्क, चूना पत्थर।
कर्नाटक और महाराष्ट्र में प्रमुख खनन क्षेत्र।
2.8 मानव जीवन और संस्कृति
यहाँ खेती, बागान, मसाले की खेती, कॉफी और चाय उत्पादन होता है।
केरल के बैकवाटर्स, महाबलेश्वर, ऊटी, मुन्नार प्रमुख पर्यटन स्थल हैं।
यह क्षेत्र सांस्कृतिक दृष्टि से भी समृद्ध है।
---
3. पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट का तुलनात्मक अध्ययन
विशेषता पूर्वी घाट पश्चिमी घाट
स्थिति बंगाल की खाड़ी के समानांतर अरब सागर के समानांतर
लंबाई 1450 किमी (लगभग) 1600 किमी (लगभग)
ऊँचाई औसत 600-900 मीटर औसत 900-1600 मीटर
प्रमुख शिखर महेंद्रगिरि (1501 मी.) अनैमुदि (2695 मी.)
संरचना असंगठित, कटे-फटे निरंतर, संगठित
नदियाँ महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी (कटाव करती हैं) गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, पेरियार (स्रोत स्थल)
वर्षा अपेक्षाकृत कम अधिक (विशेषकर पश्चिमी ढलान पर)
वनस्पति शुष्क पर्णपाती, झाड़ीदार वन सदाबहार, मसालेदार वन
जैव विविधता सामान्य उच्च (विश्व हॉटस्पॉट)
खनिज लौह, बॉक्साइट, कोयला बॉक्साइट, लौह, चूना पत्थर
मानव जीवन जनजातीय समाज, खनन कृषि, बागान, पर्यटन
---
4. आर्थिक महत्व
पूर्वी घाट : खनिज संपदा, सिंचाई, जनजातीय आजीविका।
पश्चिमी घाट : जलविद्युत, पर्यटन, मसाले और कॉफी-चाय उत्पादन, वर्षा वनों से औषधीय लाभ।
---
5. पर्यटन महत्व
पूर्वी घाट : तिरुपति, अरिकामेडु, विशाखापट्टनम, भुवनेश्वर।
पश्चिमी घाट : ऊटी, कोडाईकनाल, मुन्नार, महाबलेश्वर, कोर्ग।
---
6. निष्कर्ष
पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट दोनों ही भारत की भौगोलिक, सांस्कृतिक और आर्थिक धरोहर हैं।
पश्चिमी घाट अधिक जैव-विविध, वर्षा-समृद्ध और निरंतर पर्वत श्रृंखला है।
पूर्वी घाट खनिज संपदा, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
दोनों ही भारत की नदियों, जलवायु, वनों और मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं और मिलकर भारत के दक्षिणी भूभाग को अद्वितीय बनाते हैं।
--
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें