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दीवाली (Diwali / दीपावली) – प्रकाश का महान पर्व

दिवाली 
यह रहा आपका शब्दों का विस्तृत हिंदी लेख “दीवाली (Diwali)” — जिसमें इसका इतिहास, धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक सभी पहलू विस्तार से बताए गए हैं।


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🌟 दीवाली (Diwali / दीपावली) – प्रकाश का महान पर्व

प्रस्तावना

दीवाली या दीपावली भारत का सबसे प्रसिद्ध और पवित्र पर्व है, जिसे “प्रकाश का त्योहार” कहा जाता है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। यह त्योहार हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है, जो सामान्यतः अक्टूबर या नवंबर के महीने में पड़ती है।
दीवाली का उत्सव केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह त्योहार पूरे भारतवर्ष को रोशनी, उमंग, प्रेम और सद्भाव के रंगों में रंग देता है।


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1. दीवाली का अर्थ और नाम की उत्पत्ति

“दीपावली” शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है — ‘दीप’ (दीया) और ‘आवली’ (पंक्ति)। इसका शाब्दिक अर्थ है दीयों की पंक्ति। समय के साथ यह शब्द “दीवाली” के रूप में प्रचलित हुआ।
यह नाम अपने आप में इस त्योहार की आत्मा को व्यक्त करता है — क्योंकि इस दिन घर, मंदिर, सड़कें, और नगर-ग्राम सब जगह दीपक जलाकर अंधकार को मिटाया जाता है।


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2. दीवाली का इतिहास और उत्पत्ति

दीवाली की उत्पत्ति के संबंध में कई कथाएँ और ऐतिहासिक संदर्भ मिलते हैं।

(क) रामायण से संबंध

सबसे प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूर्ण कर रावण का वध कर अयोध्या लौटे, तब अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में पूरे नगर को दीपों से सजाया। उसी दिन से यह परंपरा आरंभ हुई।
इसलिए दीवाली को “श्रीराम के लौटने का उत्सव” भी कहा जाता है।

(ख) लक्ष्मी जी का जन्म दिवस

कुछ मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक अमावस्या के दिन माता लक्ष्मी का समुद्र मंथन से प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन लक्ष्मी पूजा की जाती है, ताकि घर में समृद्धि, धन और सौभाग्य का आगमन हो।

(ग) भगवान विष्णु और राजा बलि की कथा

वैष्णव मत के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि को पाताल लोक भेजा था और कहा कि वर्ष में एक दिन उसे पृथ्वी पर आने की अनुमति होगी। यह दिन दीवाली के रूप में मनाया जाता है।

(घ) जैन और सिख परंपरा

जैन धर्म में, दीवाली को भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है।

सिख धर्म में, यह दिन गुरु हरगोबिंद जी की जेल से रिहाई का प्रतीक है, जिसे “बंदी छोड़ दिवस” कहा जाता है।


इस प्रकार, दीवाली केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता और विविधता का प्रतीक भी है।


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3. दीवाली का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

दीवाली के पांच दिनों का क्रम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, और हर दिन का अलग धार्मिक अर्थ है।

(1) धनतेरस

दीवाली की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन धन्वंतरि देवता का जन्म हुआ था। लोग इस दिन बर्तन, सोना या नई वस्तुएँ खरीदते हैं, क्योंकि इसे शुभ माना जाता है।

(2) नरक चतुर्दशी या छोटी दीवाली

यह दिन नरकासुर नामक राक्षस के वध की स्मृति में मनाया जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। लोग इस दिन स्नान, सफाई और सजावट करते हैं।

(3) मुख्य दीवाली – अमावस्या की रात्रि

यह मुख्य पर्व का दिन है। लोग लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं, घरों में दीपक जलाते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं, और आतिशबाज़ी करते हैं।
यह रात धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने का अवसर मानी जाती है।

(4) गोवर्धन पूजा

यह दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की स्मृति में मनाया जाता है। किसान इस दिन गौ-पूजा और अन्नकूट का आयोजन करते हैं।

(5) भाई दूज

दीवाली का अंतिम दिन भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक होता है। बहन अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है।


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4. दीवाली की तैयारी और परंपराएँ

दीवाली आने से कई दिन पहले घरों, दुकानों और दफ्तरों की सफाई शुरू हो जाती है। इसे अशुभ शक्तियों और नकारात्मकता को दूर करने का प्रतीक माना जाता है।
लोग नए कपड़े खरीदते हैं, घरों को रंगते-सजाते हैं, और दीपमालाएँ लगाते हैं।
दीवाली की रात को लाखों दीये जलाकर पूरा वातावरण जगमगा उठता है।

मुख्य परंपराएँ:

घर की सफाई और सजावट

रंगोली बनाना

लक्ष्मी-गणेश पूजा

मिठाई बाँटना और उपहार देना

पटाखे और आतिशबाज़ी

नए खाते (बहीखाते) की पूजा, व्यापारिक आरंभ का प्रतीक



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5. दीवाली से जुड़ी पौराणिक कथाएँ

(क) श्रीराम और रावण का युद्ध

दीवाली का मुख्य सार अंधकार पर प्रकाश की जीत है। भगवान राम का रावण पर विजय प्राप्त करना इस भाव को साकार करता है।

(ख) लक्ष्मी और विष्णु विवाह

कथाओं में यह भी कहा गया है कि इसी दिन लक्ष्मी जी और विष्णु जी का विवाह हुआ था। इसलिए यह दिन धन और प्रेम का मिलन भी माना जाता है।

(ग) नरकासुर का वध

भगवान कृष्ण ने इस दिन नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था, जिसने 16,000 कन्याओं को बंदी बना रखा था। इसे नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है।


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6. दीवाली और पर्यावरण

आज के समय में दीवाली का स्वरूप बदल गया है। अत्यधिक पटाखे और प्रदूषण से पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
धुएँ, शोर और कचरे से वायु गुणवत्ता खराब होती है और जानवरों को हानि पहुँचती है।
इसलिए अब ग्रीन दीवाली (Green Diwali) का संदेश दिया जा रहा है — जिसमें पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना उत्सव मनाया जाए।

ग्रीन दीवाली के उपाय:

मिट्टी के दीये जलाना

पर्यावरण-अनुकूल रंगोली

कम ध्वनि वाले पटाखे

पौधे उपहार में देना

ऊर्जा की बचत करना



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7. दीवाली का आर्थिक और सामाजिक महत्व

(क) व्यापारिक दृष्टि से

दीवाली भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे सक्रिय व्यापारिक अवधि होती है।
इस समय:

सोना, चाँदी, वाहन, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की बिक्री बढ़ती है।

स्टॉक मार्केट में नया साल शुरू होता है (मुहूर्त ट्रेडिंग)।

व्यापारी अपने बहीखाते बदलते हैं।


(ख) सामाजिक दृष्टि से

दीवाली लोगों को एकजुट करती है। परिवार, रिश्तेदार और मित्र एक साथ मिलते हैं, उपहार बाँटते हैं, और मिठाइयाँ साझा करते हैं।
यह पर्व प्रेम, एकता और भाईचारे को सुदृढ़ करता है।


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8. विदेशों में दीवाली

दीवाली अब केवल भारत तक सीमित नहीं रही। यह आज विश्व-स्तर पर मनाया जाने वाला भारतीय पर्व बन चुका है।
अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फिजी, मॉरीशस, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों में भारतीय समुदाय बड़े उत्साह से दीवाली मनाता है।
कई देशों में इस दिन सरकारी छुट्टी भी दी जाती है, और सार्वजनिक स्थानों पर दीपमालाएँ जगमगाती हैं।


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9. आधुनिक युग में दीवाली

आज की दीवाली परंपरा और आधुनिकता का संगम है।
लोग अब LED लाइट्स, इलेक्ट्रॉनिक दीये, और डिजिटल ग्रीटिंग कार्ड्स से त्योहार मनाते हैं।
सोशल मीडिया पर शुभकामनाएँ भेजना आम बात हो गई है।
फिर भी, दीवाली का आध्यात्मिक अर्थ वही है — अपने अंदर के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का दीप जलाना।


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10. दीवाली से मिलने वाले जीवन-संदेश

दीवाली केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन है।
यह हमें सिखाती है:

अंधकार चाहे कितना भी गहरा हो, एक दीपक उसे मिटा सकता है।

अच्छाई की जीत निश्चित है।

प्रकाश, प्रेम और करुणा ही सच्ची समृद्धि हैं।

स्वच्छता, सत्य और सादगी ही वास्तविक सजावट हैं।



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निष्कर्ष

दीवाली भारत की आत्मा का प्रतीक है — यह त्योहार हमें जोड़ता है, जगमगाता है, और आत्मा को शुद्ध करता है।
यह पर्व हर व्यक्ति के भीतर यह प्रेरणा जगाता है कि हम अपने जीवन से अंधकार, दुख, लोभ, और नफरत को दूर करें और प्रेम, ज्ञान, और प्रकाश के दीप जलाएँ।

जब हर मन दीप बनेगा, तब सच्चे अर्थों में दीवाली का प्रकाश संसार को आलोकित करेगा।


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🌸 शुभ दीवाली! 🌸
“प्रकाश फैलाइए, प्रेम बाँटिए, और हर दिल में दीप जलाइए।”


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