यह रहा आपका आर्टिकल — शीर्षक: “धरती से ढूँढी मेहनत: किसान का संघर्ष” (किसानी की आत्मा और किसान की मेहनत को समर्पित) --- 🌾 प्रस्तावना भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ की धरती की पहचान उसके किसानों से है — वो किसान जो सूरज की पहली किरण के साथ जागता है और अंधेरा छाने तक खेतों में पसीना बहाता है। “धरती से ढूँढी मेहनत” सिर्फ़ एक वाक्य नहीं, बल्कि उस किसान की रोज़ की कहानी है जो मिट्टी में जीवन बोता है और आशा की फसल काटता है। --- 🌱 किसान का जीवन: सुबह से शाम तक का संघर्ष किसान का दिन सूरज उगने से पहले शुरू होता है। वह अपने हल, ट्रैक्टर या बैलों के साथ खेतों की ओर निकल पड़ता है। बीज बोना हो या खेतों की जुताई — हर काम समय से पहले और सटीक होना जरूरी है। गर्मी, सर्दी, बरसात — हर मौसम में किसान अपनी जिम्मेदारी निभाता है। उसके हाथों की लकीरें मिट्टी में घुली होती हैं, और उसका पसीना खेतों को हरियाली देता है। --- 🌾 फसल की परवरिश: जैसे माता अपने बच्चे की करती है फसल को उगाना सिर्फ तकनीक नहीं, एक भावना है। किसान अपनी फसल को बच्चे की तरह पालता है — सही समय पर पानी देना, कीटों से सुरक्षा ...
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