यह रहा Field Marshal Sam Manekshaw (फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ) का पूरा परिचय हिंदी में 👇
---
🇮🇳 फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का जीवन परिचय
🪖 पूरा नाम:
सैम होरमूज़जी फ्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ (Sam Hormusji Framji Jamshedji Manekshaw)
📅 जन्म:
3 अप्रैल 1914, अमृतसर (पंजाब, ब्रिटिश भारत)
⚰️ मृत्यु:
27 जून 2008, वेलिंगटन, तमिलनाडु, भारत
---
👨👩👦 पारिवारिक पृष्ठभूमि
सैम मानेकशॉ एक पारसी परिवार से थे। उनके पिता होरमूज़जी मानेकशॉ डॉक्टर थे और माता हिराबाई एक गृहिणी थीं।
उनका परिवार ईमानदारी, अनुशासन और देशप्रेम के मूल्यों को बहुत महत्व देता था।
---
🎓 शिक्षा और प्रारंभिक जीवन
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अमृतसर और शिमला में प्राप्त की।
बाद में उन्होंने इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA), देहरादून में दाखिला लिया।
वे 1934 में ब्रिटिश भारतीय सेना में शामिल हुए।
वह IMA के पहले बैच के कैडेट्स में से एक थे।
---
⚔️ सैन्य करियर की शुरुआत
सैम मानेकशॉ को उनकी तेज़ बुद्धि, नेतृत्व क्षमता और बहादुरी के लिए जाना जाता था।
द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के दौरान उन्हें बर्मा (म्यांमार) में जापानियों से लड़ने भेजा गया।
युद्ध के दौरान उन्हें गंभीर गोली लगी, पर उन्होंने अद्भुत साहस दिखाया और Military Cross से सम्मानित किए गए।
---
🇮🇳 भारत की आज़ादी के बाद की भूमिका
भारत की स्वतंत्रता के बाद उन्होंने भारतीय सेना में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में काम किया जैसे:
जम्मू-कश्मीर (1947 युद्ध के दौरान)
नागालैंड (1960 के दशक में विद्रोह नियंत्रण)
ईस्टर्न कमांड (पूर्वी क्षेत्र) के प्रमुख के रूप में
उनकी कार्यकुशलता और निर्णय क्षमता ने उन्हें एक उत्कृष्ट सेनाधिकारी बना दिया।
---
🧠 1971 का भारत-पाक युद्ध (Bangladesh Liberation War)
यह सैम मानेकशॉ का सबसे ऐतिहासिक और गौरवशाली योगदान था।
दिसंबर 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ।
मानेकशॉ ने पूरे युद्ध की रणनीति तैयार की।
उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने सिर्फ 13 दिनों में विजय प्राप्त की।
इसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का जन्म हुआ।
इस जीत के बाद उन्हें “सैम बहादुर” कहा जाने लगा।
---
🎖️ सम्मान और उपाधियाँ
फ़ील्ड मार्शल (Field Marshal) – यह भारतीय सेना का सबसे उच्च पद है, जो उन्हें 1 जनवरी 1973 को दिया गया।
पद्म भूषण (Padma Bhushan) – 1968
पद्म विभूषण (Padma Vibhushan) – 1972
Military Cross – ब्रिटिश सरकार द्वारा (द्वितीय विश्व युद्ध में साहस के लिए)
---
🗣️ उनकी व्यक्तित्व की विशेषताएँ
तेज दिमाग और हाज़िरजवाबी के लिए प्रसिद्ध।
अपने सैनिकों से आत्मीय व्यवहार करते थे।
कभी झूठ नहीं बोलते थे और हर परिस्थिति में शांत रहते थे।
उनका प्रसिद्ध कथन था:
> “If a man says he is not afraid of dying, he is either lying or he is a Gorkha.”
(अगर कोई कहता है कि उसे मरने से डर नहीं लगता, तो या तो वह झूठ बोल रहा है या वह एक गोरखा है।)
---
🏡 अंतिम जीवन
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने वेलिंगटन (तमिलनाडु) में जीवन बिताया।
27 जून 2008 को 94 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।
उनका अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया।
---
🌟 विरासत (Legacy)
वे भारत के पहले और अब तक के दो फील्ड मार्शलों में से एक हैं।
उनके जीवन पर आधारित फ़िल्म “Sam Bahadur” (2023) में अभिनेता विक्की कौशल ने उनका किरदार निभाया।
वे भारत के इतिहास में एक आदर्श, प्रेरणास्रोत और वीर सैनिक के रूप में सदैव याद किए जाएंगे।
---
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें