यहाँ Critical Minerals Ministerial (क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल) की पूरी जानकारी सरल हिंदी में दी जा रही है 👇
🔹 क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल क्या है?
Critical Minerals Ministerial एक अंतरराष्ट्रीय उच्च-स्तरीय बैठक है, जिसमें विभिन्न देशों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भाग लेते हैं। इस बैठक का उद्देश्य उन खनिजों (Minerals) पर सहयोग बढ़ाना है जिन्हें क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज) कहा जाता है।
ये खनिज आधुनिक दुनिया के लिए बेहद जरूरी हैं, जैसे:
इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
बैटरी
सोलर और विंड एनर्जी
मोबाइल, कंप्यूटर, चिप्स
रक्षा और अंतरिक्ष तकनीक
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🔹 क्रिटिकल मिनरल्स क्या होते हैं?
क्रिटिकल मिनरल्स वे खनिज होते हैं:
जिनकी आर्थिक और रणनीतिक महत्ता बहुत अधिक होती है
जिनकी आपूर्ति सीमित देशों में केंद्रित होती है
जिनकी कमी से देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है
प्रमुख क्रिटिकल मिनरल्स:
लिथियम (Lithium)
कोबाल्ट (Cobalt)
निकल (Nickel)
रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Elements)
ग्रेफाइट (Graphite)
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🔹 यह मिनिस्टीरियल क्यों जरूरी है?
आज के समय में:
चीन कई क्रिटिकल मिनरल्स की माइनिंग और प्रोसेसिंग में दबदबा रखता है
बाकी देश इस पर अत्यधिक निर्भर हैं
इसलिए यह बैठक आयोजित की गई ताकि:
सप्लाई चेन को सुरक्षित और विविध बनाया जा सके
किसी एक देश पर निर्भरता कम हो
खनिजों की न्यायसंगत और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके
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🔹 Critical Minerals Ministerial के मुख्य उद्देश्य
1️⃣ सुरक्षित सप्लाई चेन बनाना
खनिजों की खुदाई, प्रोसेसिंग और सप्लाई को कई देशों में फैलाना।
2️⃣ अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना
माइनिंग, रीसाइक्लिंग, टेक्नोलॉजी और निवेश में मिलकर काम करना।
3️⃣ नई वैश्विक पहल (FORGE Initiative)
यह पहल पुराने Mineral Security Partnership की जगह लाई गई है, जिससे मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई नेटवर्क बने।
4️⃣ स्वच्छ ऊर्जा और भविष्य की तकनीक
EV, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल टेक्नोलॉजी के लिए खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
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🔹 भारत की भूमिका 🇮🇳
भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भाग लिया
भारत ने FORGE पहल का समर्थन किया
भारत ने अपनी National Critical Mineral Mission का उल्लेख किया
रेयर अर्थ और बैटरी मिनरल्स में भारत निवेश और साझेदारी बढ़ा रहा है
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🔹 वैश्विक महत्व 🌍
आज क्रिटिकल मिनरल्स सिर्फ व्यापार का विषय नहीं हैं, बल्कि:
राष्ट्रीय सुरक्षा
ऊर्जा सुरक्षा
तकनीकी आत्मनिर्भरता
भू-राजनीति (Geopolitics)
से सीधे जुड़े हुए हैं।
इसीलिए अमेरिका, यूरोप, भारत, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश मिलकर नई रणनीति बना रहे हैं।
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🔹 निष्कर्ष
Critical Minerals Ministerial दुनिया के देशों का यह प्रयास है कि:
भविष्य की तकनीक के लिए जरूरी खनिज सुरक्षित रहें
कोई भी देश संसाधनों का गलत उपयोग कर दबाव न बना सके
ग्रीन एनर्जी और विकास को रुकने न दिया जाए
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अगर आप चाहें तो मैं:
क्रिटिकल मिनरल्स की पूरी सूची
भारत में मौजूद क्रिटिकल मिनरल्स
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