ग्लोबमास्टर C-17 (Globemaster C-17) : विस्तृत हिंदी लेख
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प्रस्तावना
ग्लोबमास्टर C-17 (Boeing C-17 Globemaster III) एक बहुउद्देश्यीय सामरिक और रणनीतिक परिवहन विमान है, जिसका उपयोग भारी सैन्य उपकरण, सैनिकों और मानवीय राहत सामग्री को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने के लिए किया जाता है। इसे अमेरिकी कंपनी मैकडॉनेल डगलस (McDonnell Douglas) ने डिज़ाइन किया था, जिसे बाद में बोइंग (Boeing) ने अधिग्रहित किया। यह विमान विश्व के सबसे शक्तिशाली और भरोसेमंद परिवहन विमानों में गिना जाता है और भारतीय वायुसेना (IAF) में भी इसकी अहम भूमिका है।
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विकास और इतिहास
1. शुरुआत – 1980 के दशक में अमेरिका ने एक नए हैवी-लिफ्ट एयरक्राफ्ट की आवश्यकता महसूस की।
2. डिज़ाइन और निर्माण – मैकडॉनेल डगलस ने इसका निर्माण शुरू किया और पहला C-17 ग्लोबमास्टर 15 सितंबर 1991 को उड़ान भरा।
3. बोइंग द्वारा अधिग्रहण – 1997 में बोइंग ने मैकडॉनेल डगलस को खरीद लिया और इसके बाद से C-17 का उत्पादन बोइंग करती रही।
4. सेवा में प्रवेश – 1993 में अमेरिकी वायुसेना ने इसे आधिकारिक तौर पर अपनाया।
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विशेषताएँ और डिज़ाइन
लंबाई : 53 मीटर
पंख फैलाव (Wingspan) : 51.75 मीटर
ऊँचाई : 16.8 मीटर
अधिकतम वजन : लगभग 265,000 किलोग्राम
कार्गो क्षमता : लगभग 77 टन
गति : 830 किलोमीटर प्रति घंटा (मैक्स क्रूज़ स्पीड)
रेंज : लगभग 4,500 किलोमीटर बिना ईंधन भरे
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तकनीकी खूबियाँ
1. चार टर्बोफैन इंजन – Pratt & Whitney F117-PW-100 इंजन लगे होते हैं।
2. उन्नत एवियोनिक्स – पायलटों के लिए आधुनिक ग्लास कॉकपिट और डिजिटल कंट्रोल।
3. कम रनवे पर संचालन – यह विमान छोटे और कच्चे हवाई पट्टियों से भी टेकऑफ और लैंडिंग कर सकता है।
4. एयर-ड्रॉप क्षमता – यह पैराट्रूपर्स और भारी उपकरणों को हवा से सीधे उतार सकता है।
5. टैंक और हेलीकॉप्टर परिवहन – इसमें टैंक, बख्तरबंद गाड़ियाँ और हेलीकॉप्टर तक लोड किए जा सकते हैं।
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भारतीय वायुसेना में C-17
भारत ने 2011 में 10 ग्लोबमास्टर C-17 विमानों की खरीद अमेरिका से की थी।
पहला विमान जून 2013 में भारत पहुँचा।
ये विमान हरियाणा के हिंडन एयरबेस (ग़ाज़ियाबाद) और बाद में चंडीगढ़ एयरबेस में तैनात किए गए।
भारतीय वायुसेना में इन विमानों का मुख्य काम है:
आपदा राहत सामग्री पहुँचाना (जैसे भूकंप, बाढ़, महामारी के समय)
सीमा क्षेत्रों में सैनिकों और हथियारों की तैनाती
अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन में भागीदारी
मानवीय सहायता और आपातकालीन निकासी अभियान
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महत्वपूर्ण मिशन
2013 उत्तराखंड बाढ़ राहत कार्य में C-17 का व्यापक उपयोग हुआ।
कोविड-19 महामारी के दौरान ऑक्सीजन टैंकर और मेडिकल सामग्री ढोने में इनकी बड़ी भूमिका रही।
विदेशों से भारतीय नागरिकों की वापसी (जैसे अफगानिस्तान से एयरलिफ्ट) में भी यह अहम साबित हुआ।
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अन्य देशों में उपयोग
C-17 विमान अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, क़तर, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और भारत जैसे देशों की वायुसेना में भी शामिल है।
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निष्कर्ष
ग्लोबमास्टर C-17 सिर्फ एक सैन्य परिवहन विमान नहीं है, बल्कि यह किसी भी देश की रणनीतिक क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है। भारतीय वायुसेना के पास इसकी मौजूदगी से देश की सामरिक शक्ति और आपदा प्रबंधन क्षमता दोनों में बड़ा सुधार हुआ है। यह विमान आधुनिक युद्ध और राहत अभियानों में "गेम चेंजर" साबित हुआ है।
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