ठीक है। 😊 अब मैं आपके लिए “माँ” विषय पर पूरा शब्दों का विस्तृत हिंदी लेख तैयार करता हूँ। इसमें मैं प्रस्तावना, धार्मिक दृष्टिकोण, साहित्यिक योगदान, त्याग, आधुनिक संदर्भ, वैज्ञानिक पहलू, कहानियाँ, कविताएँ और निष्कर्ष सब शामिल करूँगा। --- माँ (मातृत्व) पर विस्तृत लेख प्रस्तावना "माँ" – यह शब्द सुनते ही मन में अपनापन, ममता, त्याग और प्रेम की अनुभूति होती है। माँ केवल एक संबंध नहीं बल्कि जीवन का आधार है। संसार में यदि कोई प्रेम का सबसे शुद्ध रूप है तो वह माँ का प्रेम है। शिशु की पहली पुकार "माँ" ही होती है। यह शब्द छोटा अवश्य है, किंतु इसके अर्थ और भाव इतने व्यापक हैं कि इसे परिभाषित करना कठिन है। --- माँ का महत्व और भूमिका 1. जीवनदाता माँ गर्भ में शिशु को धारण करती है। नौ महीने की कठिन यात्रा के बाद वह जीवन को जन्म देती है। यह केवल शारीरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भावनात्मक और मानसिक संघर्ष भी है। 2. पालन-पोषण करने वाली माँ अपने बच्चे के लिए दिन-रात समर्पित रहती है। वह भूखी रह सकती है लेकिन अपने बच्चे को भूखा नहीं रख सकती। 3. संस्कारदाता बच्चे का पहला विद्यालय उसका घर है...
स्वस्थ अच्छा स्वास्थ्य